15 जनवरी को है मकर संक्रांति, ये है दान करने का शुभ मुहूर्त और महत्व

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हाथरस । मकर संक्रांति हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस साल दान-पुण्य का यह महापर्व मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जाएगा। हालांकि मकर संक्रांति की सही तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है लेकिन हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार यदि किसी वर्ष मकर संक्रांति का पर्व शाम को पड़ता है तो इसे अगले दिन मनाया जाता है। यह वजह है कि इस वर्ष मकर संक्रांति को 15 जनवरी को मनाया जायेगा। मकर संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान करने से व्यक्ति को उसका अभीष्ट लाभ मिलता है। तो आइए जानते हैं मकर संक्रांति के दिन दान करने का आखिर क्या है शुभ मुहूर्त और महत्व। 

दान करने का शुभ समय-

हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति के दिन शुरू के छह घंटे के भीतर यदि कोई व्यक्ति दान पुण्य करता है तो उसका विशेष महत्व होता है। इसका मतलब इस वर्ष 14 जनवरी, शाम 7.50 के बाद छह घंटे तक किए गए दान का अभीष्ट लाभ मिलेगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 15 जनवरी को मकर संक्रांति से जुड़े दान-पुण्य के कार्य नहीं किए जा सकते हैं। इस दिन भी पूरे दिन दान पुण्य के कार्य किए जा सकते हैं।

मकर संक्रांति पर करें किस चीज का दान

मकर संक्रांति के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना बेहद पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन खिचड़ी का दान देना विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन से सभी शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी समाप्त हो जाता है। बता दें, उत्तर प्रदेश में इस पर्व पर खिचड़ी सेवन और खिचड़ी दान का अत्यधिक महत्व बताया जाता है।

मकर संक्रांति से जुड़े पौराणिक तथ्य-

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे−पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। साथ ही महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए इस दिन तर्पण किया था। यही वजह है कि मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में हर साल मेला लगता है।

मकर संक्रांति के इस दिन इन 5-6 बातों का जरूर रखें ध्यान

तिल, गुड़, चूड़ा-दही, खिचड़ी का त्योहार है मकर संक्रांति। सूर्य जब राशि परिवर्तिन करते हैं यानी सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में पहुंचने पर मकर संक्रांति मनाई जाती है। मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान की परंपरा है। इस दिन कई जगह पितरों को जल में तिल अर्पण भी दिया जाता है। इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन  महाभारत में पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही स्वेच्छा से शरीर का परित्याग किया था। उनका श्राद्ध संस्कार भी सूर्य की उत्तरायण गति में हुआ था। 


इस दिन इन बातों को ध्यान रखना चाहिए:

  1. संक्रांति के दिन सुबह सुबह पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। पवित्र नदी में स्नान न कर पाएं तो घर में तिल के जल से स्नान कर सकते हैं। 
  2. स्नान करने के बाद आराध्य देव की प्रार्थना करनी चाहिए। 
  3. इसके बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए जल में तिल अर्पण करना चाहिए। 
  4. इस बात का ध्यान रखें कि स्नान के बाद दान का बहुत महत्व है, इसलिए स्नान के बाद तिल दान करना चाहिए।
  5. इसके अलावा गर्म कपड़े, चावल, दूध दही और खिचड़ी का दान करना चाहिए।
  6. इस त्योहार पर घर में तिल्ली और गुड़ के लड्डू बनाए जाने की परंपरा है। इसलिए इस दिन भोजन में भी तिल शामिल करने चाहिए।

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