प्यार किया तो मां-बाप और चाचा ने ही उतार दिया था मौत के घाट

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-न्यायालय ने सुनाई आजीव सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा
-अपर शासकीय अधिवक्ता राजपाल सिंह दिशवार के तर्कों ने मृतका को दिलाया न्याय

हाथरस। ऑनर किलिंग के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या द्वितीय प्रतिभा सिंह ने तीन लोगों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही बीस-बीस हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी कारावास में शामिल किया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक घटना दिनांक 28 अप्रैल 2012 को थाना सासनी के गांव देदामई निवासी रामप्रकाश पाठक पुत्र दरियाव पाठक ने थाना सासनी में अपराध संख्या 150/12 पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस के मुताबिक जब अज्ञात के नाम दर्ज हुए इस मामले में पुलिस ने विवेचना की तो मुनेश पुत्र अलीवक्स, गुड्डो देवी पत्नी मुनेश निवासीगण मानिकपुर जलेसर रोड थाना सहपऊ व नजरुद्दीन पुत्र आवदी निवासी घासीपुर थाना मडराग, अलीगढ़ को धारा 302 व 201 का आरोपी बनाते हुए न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया।
जिसमें विद्वान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजपाल सिंह दिशवार द्वारा मौखिक तर्कों में यह कहा गया है कि प्रस्तुत प्रकरण अपने आपम में हत्या जैसे जघन्य अपराध का अनूठा प्रकरण है। जिसमें अभियुक्तगण मृतका के भाई, मां और चाचा है। वस्तुतः प्रस्तुत प्रकरण आॅनर किलिंग से संबंधित है। वास्तव में मृतका शहनाज अपनी इच्छा से किसी व्यक्ति से विवाह करना चाहती थी। उसका प्रेम प्रसंग हसार उर्फ भूरा नाम के व्यक्ति से था और अभियुक्तगण जो कि मृतका के परिवार के लोग हैं, उन्हें यह बात पसंद नहंीं थी। इसी कारण उन्होंने मृतका को अन्य स्थान पर ले जाकर अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और झूठी साख बनाये रखने के
लिये मृतका की हत्या दी थी। अभियुक्तगण द्वारा न केवल हत्या का अपराध कारित किया है अपितु मृतका के साथ उसके विश्वास और रिश्ते की भी हत्या की गयी है। अभियोजन पक्ष की ओर से जो मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत हुआ है उनसे घटना भली भांति साबित है। अभियुक्तगण की सीडीआर लो केशन भी पत्रावली पर दाखिल है और उसके कथन में बचाव पक्ष द्वारा कुछ नहीं कहा गया है। अभियुक्तगण के विरूद्व कहे गये कथन युक्ति-युक्त संदेह से परे साबित है और अभियुक्तगण को दोषसिद्व किये जाने की प्रार्थना की गयी।
इस मामले में निर्णय सुनाते हुए न्यायालय ने तीनों को आईपीसी की धारा 201 के तहत सात वर्ष सश्रम कारावास व दस-दस हजार के अर्थदंड व धारा 302 के तहत तीनों को श्रसम आजीवन कारावास व बीस-बीस हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक कारावास का प्रावधान भी न्यायालय ने सजा में शामिल किया है।

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