कोरोना: सावधानी रखें, अफवाहों से बचें

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अनुपम वर्मा, लेखिका
हाथरस । पूरा विश्व कोरोना वायरस से जूझ रहा है , ऐसे में इसे लेकर लोगों में डर और भ्रांतियां होना स्वाभाविक है। हर व्यक्ति एलोपैथी से लेकर आयुर्वेद तक हर चिकित्सा टोटका नुस्खा आजमा रहा है। परंतु आत्मसंतुष्टि के लिए हर उपाय करना अलग बात है और किसी महामारी से बचना एक अलग बात। कई बार अंधविश्वास हमें दुस्साहस से भर देता है और हम लापरवाह हो उठते हैं। ऐसे में हमें बेहद सोच समझकर कदम उठाना होगा ताकि हम अपना बचाव करते हुए देश के डॉक्टर्स और मेडिकल टीम पर बढ़ती
मरीजों की संख्या में कमी ला सकें।


निःसंदेह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन इसे लेकर अति न करें, तथा अपना वैद्य खुद न बनें। नॉर्मल फ्लू सर्दी जुकाम को गम्भीरता से अवश्य लें परंतु ऐसे सामान्य रोगियों को कोरोना पीड़ित की तरह चिन्हित करने से पहले , हेल्पलाइन नम्बर पर कॉल करके परामर्श करें।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इलाज के अजीबोगरीब पर्चे, वीडियो और नुस्खे आयुर्वेद इलाज नहीं है। हम सब कोरोना से डरे हुए हैं और डरा हुआ व्यक्ति भरोसा करने की जल्दबाजी करता है , ऐसे में विवेक से काम लें, हड़बड़ाहट हमारी सेहत और माहौल दोनों को नकारात्मक बनाएगी। बाज़ार हमारे डर का लाभ उठाने को हमेशा आतुर रहा है। ऐसे में जिम्मेदार और जागरूक नागरिक होने के नाते हमें चाहिए कि हम घर मे राशन और अन्य जरूरी सामानों का स्टॉक जरूरत से ज्यादा न करें । तथा ये भी खयाल रखें कि घर में कोरोना वायरस को लेकर हुई बातचीत हमारे बुजुर्गों को तकलीफ देह स्थिति में न डाले क्योंकि इस वायरस का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों पर देखा गया है। स्वच्छता और सकारात्मकता और संक्रमण से बचाव ही कोरोना का असली इलाज है।

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