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कोरोना के दौर में महसूस होने लगी मनोचिकित्सा की जरूरत

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-घर बैठे परामर्श देने के लिए साइकोलॉजिकल सपोर्ट टीम कर रही टैली काउंसलिंग, अब तक 400 की काउंसिल

News 4live

मथुरा | कोविड-19 के संक्रमण और लॉकडाउन के चलते इस समय हर कोई चिन्ताग्रस्त है। किसी की भी समझ में नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा ? देखा जा रहा है कि कुछ लोग नौकरी तो कुछ कारोबार को लेकर हर वक्त चिंता में डूबे हैं। ऐसे लोगों की मानसिक परेशानी बढ रही हैं।
कृष्णा नगर के रंजीत चौधरी कहते हैं कि जो लोग कोरोना के शिकार हैं जो मानसिंक बीमारी से घिरते जा रहे हैं। कुछ लोग आइसोलेशन वार्ड में है। वे पूछते है कि कितने दिन यहां रहना होगा। हम घर कब जाएंगे, हम घर में क्वारंटाइन रह सकते हैं तो यहां क्यों रखा गया है, उन्हें अपने घर-परिवार की याद आ रही है आदि आदि सवाल मानसिक रूप से बीमार करने वाले हैं।
न्यूरो विशेषज्ञ व सहायक प्रोफेसर डा अरुण प्रताप का कहना है कै कोरोना से नौकरी व कारोबार को लेकर बढती चिंता लोगों की मानसिक बीमारी का कारण बन रही हैं।
मथुरा के मनोचिकित्सक डाॅ. गौरव सिंह का कहना है कि कोविड-19 लॉकडाउन का समय बढ़ने के साथ मथुरा जनपद में मनोरोगियों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। ज्यादातर लोग अपने परिवार के साथ हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो अपने परिवार से दूर फंस गए हैं, ऐसे लोगों पर मानसिक दबाव बढ़ गया है।
जनपद के ऐसे लोगों को घर बैठे परामर्श और चिकित्सा लाभ पहुंचाने के लिए के डी हॉस्पिटल के मनोचिकित्सा विभाग की साइकोलॉजिकल सपोर्ट टीम लगातार टैली काउंसलिंग कर रही है। इस टीम में डाॅ. गौरव सिंह. डाॅ. श्वेता चौहान, डाॅ. कमल किशोर, सचिन कुमार गुप्ता आदि शामिल हैं। जिला अस्पताल में भी मनो चिकित्सक तैनात हैं।
डाॅ. गौरव सिंह का कहना है कि अब तक साइकोलॉजिकल सपोर्ट टीम द्वारा चार सौ से अधिक लोगों से कालिंग के माध्यम से सम्पर्क किया गया है और सफल काउंसलिंग हुई है|
मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित मरीज से प्रतिदिन टैलीसाइकेट्री के माध्यम से काउंसलिंग की जा रही है और बीमारी से लड़ने की उनकी मानसिक क्षमता विकसित की जाती है।
साइकोलॉजिकल सपोर्ट टीम अपनी जान-जोखिम में डालकर 28 दिनों तक क्वारंटाइन में रह रहे डॉक्टर्स, नर्सेज, वार्डबॉय, स्वीपर आदि की भी काउंसलिंग कर हौसला बढ़ा रही है।

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